• कार्यक्रम की सफलता को लेकर आयोजन समिति ने किया स्थल निरीक्षण
• राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद बतौर मुख्य अतिथि होंगे शामिल

रामगढ़ | संवाददाता
श्री रामगढ़ गौशाला परिसर में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 67वां गोपाष्टमी महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा। श्री रामगढ़ गौशाला परिसर में लगभग सवा सौ गाय हैं। जिनमें से मात्र 20 गाय ही दुधारू है, बाकी सभी गए नथी है जिनकी गौशाला कमेटी द्वारा देखभाल की जाती है। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी रामगढ़ गौशाला परिसर में गोपाष्टमी महोत्सव का आयोजन किया गया है। जिसके मुख्य अतिथि योगेंद्र प्रसाद कैबिनेट मंत्री झारखंड सरकार,अति विशिष्ट अतिथि के रूप में अनुराग कुमार तिवारी अनुमंडल पदाधिकारी रामगढ़, विशिष्ट अतिथि के रूप में आदित्य मल्होत्रा अध्यक्ष फेडरेशन चैंबर, विनय कुमार अग्रवाल, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष फेडरेशन चैंबर विमल बुधिया, अध्यक्ष मारवाड़ी धर्मशाला कमेटी एवं मनजीत साहनी अध्यक्ष रामगढ़ चैंबर ऑफ़ कॉमर्स होंगे। पहले यह कार्यक्रम 29 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे निर्धारित था। लेकिन अब यह कार्यक्रम 2 नवंबर को सुबह 11 बजे होगा। यह निर्णय मौसम में आई अचानक बदलाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इस बीच श्री कृष्ण विद्या मंदिर एवं श्री राम प्रताप रानीलिया कृष्णा पब्लिक स्कूल के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही गौशाला कमेटी की महिला सदस्यों द्वारा खान-पान के व्यंजन का स्टॉल लगाया जाएगा। जहां शुद्ध एवं स्वादिष्ट व्यंजन उचित दामों में उपलब्ध रहेंगे। इस अवसर पर रामगढ़ गौशाला के अध्यक्ष बजरंग लाल अग्रवाल ने कहा कि गोपाष्टमी महोत्सव मनाने का मुख्य उद्देश्य को गौ संवर्धन की तरफ लोग ध्यान आकर्षित करना है। गौ या गाय हमारी संस्कृति के प्राण है यह गंगा, गायत्री, गीता, गोवर्धन, गोविंद की तरह पूज्य है। हम गाय को गौ माता कहकर संबोधित करते हैं, गाय की देह में सभी देवी देवताओं का वास होता है। गाय के गोबर में लक्ष्मी,गोमूत्र में भवानी, चरणों में देवता एवं थनों में समुद्र प्रतिष्ठित है। इस अवसर पर हम सभी गौ माता की पूजा कर पुण्य के भागी बनते है।तैयारी में मुख्य रूप से गौशाला कमेटी के सचिव शिवकुमार अग्रवाल, कोषाध्यक्ष महेंद्र अग्रवाल, कार्यकारिणी सदस्य आनंद अग्रवाल (अधिवक्ता), विमल किशोर जीजू, निशांत जैन, प्रदीप अग्रवाल, महेश कुमार अग्रवाल, महावीर बोदिया, मुरारी पोद्दार आदि मौजूद थे।
