
• स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका
रांची | संवाददाता
राज्य के प्रख्यात उद्योगपति रामचंद्र रुंगटा का रविवार को निधन हो गया। वे लंबे समय से गले के कैंसर से पीड़ित थे। इसे लेकर परिजन इलाज के लिए दिल्ली ले गए। जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही थी। इसी क्रम में तबियत बिगड़ने के दौरान बेहतर इलाज के लिए परिजन मुंबई ले गए। इस बीच इलाज के क्रम में रविवार को उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर से रांची, रामगढ़ समेत पूरे झारखंड के उद्योग जगत में शोक की लहर है। खास कर रामगढ़ में कारोबार का ज्यादा फैलाव के कारण यहां के चैंबर ऑफ कॉमर्स सहित अन्य सामाजिक संगठनों ने विशेष शोक व्यक्त किया।
कोयला के कारोबार से पाई ख्याति
प्रसिद्ध व्यवसायी रामचंद्र रुंगटा की व्यवसायिक जीवन कोयला के कारोबार से शुरु हुआ। इसके बाद उन्होंने रामगढ़ जिले में कई फैक्ट्रियों की स्थापना की। जिसने आमलोगों के लिए रोजगार का द्वार खोला। इनमें झारखंड इस्पात (रामगढ़), आलोक स्टील (करमा) और मां छिन्नमस्तिका इस्पात (हेहल-बरकाकाना) प्रमुख हैं। इसके साथ ही उन्होंने आरसी रुंगटा ग्रुप की स्थापना की थी, जिसने झारखंड के उद्योग जगत में अपनी मजबूत पहचान बनाई। रविवार 19 अक्टूबर को ही उनके पार्थिव शरीर को बनारस ला कर अग्नि संस्कार किया गया। अन्य सारे क्रिया कर्म उनके रांची स्थित आवास पर संपन्न होगा।
स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में निभाई अहम भूमिका
रामचंद्र रुंगटा को राज्य के उन चुनिंदा उद्योगपतियों में गिना जाता है, जिन्होंने स्थानीय स्तर पर उद्योग विकास, रोजगार सृजन और इस्पात कारोबार को नई दिशा दी। उनके निधन से झारखंड के उद्योग क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हुई है। रामचंद्र रुंगटा अपने पीछे राम स्वरूप रुंगटा (भाई), महावीर प्रसाद रुंगटा (भाई), नवीन रुंगटा (भतीजा), अभिषेक रुंगटा (पुत्र), आलोक रुंगटा (पुत्र), आशीष रुंगटा (पुत्र) आदि छोड़ गए हैं।