• रामशोभा कॉलेज में राष्ट्र स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन
रामगढ़ | संवाददाता
रामशोभा कॉलेज ऑफ एजुकेशन, बनखेता, चुट्टूपालू के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की ओर से एआई की भूमिका पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें बतौर मुख्य अतिथि एसपी अजय कुमार शामिल हुए। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला शिक्षा पदाधिकारी कुमारी नीलम उपस्थित रही। संगोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों ने संयुक्त रुप से दीप जलाकर और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। महाविद्यालय की चेयरपर्सन डा. बंदना कुमारी एवं निदेशक नमन ठाकुर ने मुख्य अतिथि सहित सभी गणमान्यों का स्वागत शॉल, मोमेंटम और पौधा देकर किया। मुख्य वक्ता के रूप में, तनवीर यूनुस, डीन, शिक्षा विभाग, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, प्रो. दीपक कुमार, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग, बीआईटी मेसरा, अरशद उस्मानी, डीन, कैम्ब्रिज इंस्टिट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, रांची, डा. मृत्युंजय प्रसाद, प्रोफेसर, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, डा. मौसमी कुमार, प्राचार्या, फातमा टीचर ट्रेनिंग कालेज, रांची, एवं अन्य ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में देशभर के शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने शिक्षा के भविष्य, नैतिक मूल्यों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता की शक्ति पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

एसपी अजय कुमार ने एआई के दुरुपयोग से किया सचेत
मुख्य अतिथि अजय कुमार, पुलिस अधीक्षक, रामगढ़ ने कहा कि “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा क्षेत्र में नयी संभावनाओं का द्वार खोल रहा है। लेकिन इसके साथ नैतिकता और मानवीय मूल्यों का समावेश आवश्यक है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस शक्ति को अपराधी भी बना रहा है। इसका सही उपयोग अति आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि कुमारी नीलम ने शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षण में तकनीक का उपयोग तभी सार्थक है, जब वह मानवीय संवेदनाओं के साथ जुड़ा हो। आईक्यूएसी समन्वयक अभिषेक कुमार पाण्डेय ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या डा. ज्योति वालिया ने कहा कि शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमता का उपयोग नैतिकता और मानवीय संवेदना को ध्यान में रख कर करना चाहिए। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी ने शिक्षकों और विद्यार्थियों को शिक्षा के नए आयामों पर विचार करने का अवसर प्रदान किया। शिक्षा में तकनीक और नैतिकता के संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन सहायक व्याख्याता प्रज्ञा आदित्य और सुनीति बाला चंद्रा ने किया।